Sunday, July 31, 2011

अंक - 12

कोयल घोले
कुहुक कुहुक के
टोना वन में !


एक ही ठाँव
खाड़ी की दोपहर
ताड़ों की छाँव !

-पूणिमा वर्मन






ओस की बूँद
कैक्टस पर बैठी
शूली पे सन्त !

-डॉ0 जगदीश व्योम





पेड़ सौंपते
पत्ते पीले-पीले
हरे होने को

-प्रदीप मैथानी

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