Tuesday, July 19, 2011

अंक - 11

पहाड़ रोया
हजार धार आँसू
झरना बहा ।

-अशेष वाजपेई
 




अंगार धरे
जंगल दहकाते
पलाश खड़े ।

-डा० महावीर सिंह
 
 
 


धूप हिरनी
पर्वत की घाटी में
कुलाँचें भरे ।

-डा० राजकुमारी शर्मा 'राज'
 
 


आम बौराये
प्रकृति सुन्दरी के
कानों में बाले ।

-डा० गोपाल बाबू शर्मा

No comments: