Friday, February 08, 2019

अंक - 30

बाबा का श्राद्ध
कबाड़ी खरीदता
पुरानी खाट

-पुष्पा सिंघी

Tuesday, October 16, 2018

भरा हुआ है

भरा हुआ है
बादल के थैले में
बूँदों का रेला

-त्रिलोचना कौर

सिसकती है

सिसकती है
सफेद पत्थरों में
खामोश रात

-त्रिलोचना कौर

Sunday, September 24, 2017

छुट्टी की घंटी
बजते ही मुस्काया
नन्हा-सा बंटी

-वीना मित्तल

अंक - 28

लौट आने को
करता मनुहार
अपना गाँव

-डा० सूरजमणि स्टेला कुजूर

अंक - 28

नदी के पार
गूँजता अनहद
जलपाखी-सा

-डा० सूरजमणि स्टेला कुजूर

अंक - 28

अँधेरी रात
फटी चटाई पर
ज़ख्मी सपने

-डा० सूरजमणि स्टेला कुजूर

अंक 28

झलक रहा
दीये की रोशनी में
माँ का वदन

-डा० सूरजमणि स्टेला कुजूर

अंक 28

वनों में छूटे
पढ़ाई की भूख में
सब अपने

-डा० सूरजमणि स्टेला कुजूर

अंक 28

ढेकी कूटती
वह आदिवासिनि
जीवन्त कला

-डा० सूरजमणि स्टेला कुजूर