Monday, May 26, 2014

चित्र देखकर हाइकु लेखन कार्यशाला

फेसबुक हाइकु समूह पर यह चित्र देकर हाइकु लिखने के लिए कहा गया।
चित्र देखकर हाइकु लिखने की एक परम्परा है, किसी चित्र देखकर अलग अलग तरह के भाव मन में उठते हैं, ये भाव व्यक्ति की अपनी मनोदशा को भी अभिव्यत करता है..... यह चित्र फेसबुक से ही लिया गया है, जिसने इस चित्र को अपने कैमरे से उतारा है उन  अनाम सज्जन का आभार कि उनका चित्र इतनी हाइकु कविताओं को जन्म दे गया...... बहुत कम समय में 17 हाइकु पोस्ट करके सदस्यों ने अपनी अपरिमित रचनात्मक ऊर्जा का परिचय दिया है ..... सभी को मैं हार्दिक वधाई देता हूँ।



सबसे पहले अश्विनी कुमार विष्णु ने अपना हाइकु पोस्ट किया। चित्र में धूप की परिकल्पना करते हुएरेल की पटरी पर धूप का दौड़ना और फैले हुये तम को दूर करने की अद्भुत कल्पना की है-

दौड़ रही है 
पटरी पर धूप
तम हरने

-अश्विनी कुमार विष्णु
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डा० अंजलि देवधर विश्वस्तर पर अंग्रेजी हाइकु की सुप्रसिद्ध हाइकुकार हैं, हाइकु समूह पर उनकी सहभागिता समूह के लिए बेहद सम्मान का विषय है। चित्र में जिस तरह का शांत वातावरण है वह एक दार्शनिक चिंतन की ओर भी प्रेरित करता है, उनका हाइकु जहाँ खत्म होता है वहीं से चिंतन की शुरुआत होने लगती है-

बुद्ध पूर्णिमा
कहाँ चला जा रहा (मैं)
ढूँढ़ता क्या हूँ

-डा० अंजलि देवधर
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गतिमयता ही सत्य है, चाहे वह रेल की पटरी हो या सूरज का निरंतर आना जाना, प्रकाश खत्री शायद यही कहना चाह रहे हैं-

पटरी चले 
रेल और सूरज
ज़िंदगी ज़िद्दी

-प्रकाश खत्री
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चन्द्रमा की चाँदनी मार्ग प्रशस्त करने का प्रतीक है तो रेल की पटरियाँ हमारे गंतव्य की परिचायक हैं जो हमें अपने लक्ष्य तक पहुँचने में सहायक है, ज्योतिर्मयी पन्त का हाइकु यही प्रेरणा दे रहा है-

प्रकाश पुञ्ज 
मिले सुगम मार्ग
निश्चित लक्ष्य 
.
-ज्योतिर्मयी पंत

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ध्यान चन्द के हाइकु में चन्द्रमा की किरणों का आँख मिचोली खेलना मानव जीवन में आने वाले दुख सुक की ओर संकेत करता है-

चंद्र किरण 
खेले आंख मिचोली 
चला जीवन

-ध्यान चन्द
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रेखा नायक रानो के हाइकु में साँझ ढलने के शाश्वत सत्य और जीवन यात्रा की निरंतरता की परिकल्पना की गई है, सकारात्मक सोच का यह हाइकु बहुत कुछ समाहित किये हुए है-

ढलती साँझ 
अनवरत यात्रा 
चलते जाना 

-रेखा नायक रानो 
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संजय सूद चित्र में जीवन की लम्बी राहों को पढ़ लेते हैं और निरंतर चलते रहने को ही जीवन का ध्येय मानते हैं-

लम्बी है राहे 
समय अनजाना 
चलता चल 

- संजय सूद
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यहाँ रास्ता सूना है, रात के समय है और चारो ओर नीरवता परन्तु कोई तो हमारा साथ दे रहा है और वह है चन्द्रमा की किरणें फिर भला राही को डर कैसा, निराशा में आशा की रोशनी देता हुआ गुंजन गर्ग अग्रवाल का यह हाइकु जीवन जीने की अतिरिक्त प्रेरणा दे रहा है-

सूनी डगर
चन्द्र किरण साथ
राही निडर

-गुंजन गर्ग अग्रवाल

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मीनाक्षी धनवंतरि रेल की पटरियों को पृथ्वी की माँग के रूप में देखती हैं, झिलमिलाती रोशनी आकाश में चाँदी जैसी छटा बिखेर रही हैं-

धरा की माँग
झिलमिलाता व्योम 
चाँदी बिखरी

-मीनाक्षी धनवंतरि
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रेल की पटरी हमारे लक्ष्य तक पहुँचने का माध्यम है, चन्द्रमा की चाँदनी के साथ प्रिय की नगरी तक पहुँचने की परिकल्पना इस हाइकु में आभा खरे ने की है-

रेल पटरी 
चाँद संग ले चली 
पी की नगरी 

-आभा खरे

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संध्या के घर में दिनकर का अतिथि बनकर रात भर रुकना एक अनोखी कल्पना है, अभिषेक जैन का यह हाइकु यही कहता है-

गुजारे रात
अतिथि दिनकर
संध्या के घर

-अभिषेक जैन
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मानव कहाँ से आता है और कहाँ को जाता है, कोई नहीं जानता... चित्र देखकर यती जी दार्शनिक की तरह चिंतन करने लगते हैं, उन्हें लग रहा है कि वे क्षितिज के पार कहीं चलते चले जा रहे हैं-

लग रहा है 
चला जा रहा हूँ मैं 
क्षितिज पार

-ओमप्रकाश यती
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अँधेरी पटरियों को सूर्य मानो रास्ता दिखा रहा है, डा० सरस्वती माथुर का यह हाइकु देखें-

रोशन रास्ता
पटरी को दिखाती
सूर्य की बत्ती 

-डॉ० सरस्वती माथुर

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विभा श्रीवास्तव पूर्ण अर्पण और कर्म संदेश इस चित्र में देख रही हैं-

पूर्ण अर्पण
पथ पाँव अथक
कर्म सन्देश

-विभा श्रीवास्तव
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लोक छूटने की कमी कहीं न कहीं उनके मन में खटकती रहती है जो लोक से जुड़े हुए हैं, सुनीतअ अग्रवाल चित्र में चाँद देखकर पुरानी स्मृतियों में पहुँच जाती हैं और खेतों के बीच चाँद छूटने की महानगरीय त्रासदी हाइकु में उभर कर आ जाती है-

गाँव जो छूटा
खेतों के बीच कहीं 
चाँद भी छूटा 

--सुनीता अग्रवाल (नेह)

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महेन्द्र वर्मा गुमसुम पटरियों के द्वारा चाँद को निहारने की कल्पना करते हैं-

छटा बिखरी 
गुमसुम पटरी 
चाँद निहारे

-महेंद्र वर्मा "धीर"
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अरुण सिंह रुहेला का हाइकु गज़ब की परिकल्पना करते हैं, उन्हें लगता है कि चाँद छोटा बच्चा है जो अपने पिता के साथ घूम रहा था, उसके पिता रेल में बैठकर चले गये.... वह बेचारा अकेला रह गया एकदम अनाथ

छूटी जो रेल
पिता का छूटा साथ
चाँद अनाथ

-अरुण सिंह रुहेला
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रामेश गौरी राघवन अंग्रेजी के हाइकुकार हैं, रामेश गौरी राघवन अपने हाइकु में चन्द्रमा के पश्चिम की ओर जाने पर प्रतिस्पर्धा की परिकल्पना करते हैं-


पश्चिमी ओर...
क्या चन्द्र से होगी
प्रतिस्पर्धा ?


-रामेश गौरी राघवन
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(समय सीमा के बाद प्राप्त एक अनमोल हाइकु)-

चाँद ये कहे
राह है मुझ तक 
मन तो बना

-अरविन्द चौहान

 बिल्कुल नई दृष्टि से चित्र को अरविन्द जी ने देखा है, संसार में कठिन से कठिन लक्ष्य प्राप्त किया जा सकता है मन में हौसला होना चाहिए.....दुष्यन्त के इस शेर की तरह यह हाइकु भी अदम्य प्रेरणा देने वाला है- "कौन कहता है कि आकाश में सूराख नहीं हो सकता" .......

.....................

-डा० जगदीश व्योम
सम्पादक
हाइकु दर्पण




Thursday, February 06, 2014

कन्नड़ हाइकु

कन्नड़ में शा० बालूराव ने कुछ हाइकु लिखे हैं, उनका कन्नड़ में लिखा एक हाइकु जिसका हिन्दी अनुवाद गिरधर राठी ने किया है-

==कन्नड़ हाइकु==

नदिय दंडिगे मेले
गाळि बेरळिन आट
अलेय अश्रुत गान

-शा० बालूराव
(हाइकु 18, अगस्त 1982)


==हिन्दी अनुवाद==

दरिया की डंडी पर
हवा की अंगुलियों की थिरकन
लहरों के अनसुने गीत

(अनुवाद : गिरधर राठी)

Thursday, May 30, 2013

हाइकु दर्पण का अगला अंक " हाइकु 1989 " विशेषांक


हाइकु दर्पण का अगला अंक " हाइकु 1989 " विशेषांक के रूप में प्रकाशित होने जा रहा है, जिसमें "हाइकु 1989" में प्रकाशित सभी 30 हाइकुकारों की हाइकु कविताओं को ज्यों का त्यों प्रकाशित किया जायेगा, भूमिका और कुछ टिप्पणियाँ भी रहेंगी। इस ऐतिहासिक हाइकु संकलन का संपादन कमलेश भट्ट कमल तथा रामनिवास पंथी ने किया था। यदि आप हाइकु दर्पण के इस विशेषांक को पढ़ने में रुचि रखते हैं तो कृपया सूचित करें और हाइकु दर्पण के आजीवन सदस्य बनकर सहयोग प्रदान करें।

सम्पादक
हाइकु दर्पण

000000


हाइकु दर्पण की आजीवन सदस्यता शुल्क  रु० 2500 है।
आजीवन सदस्यता हेतु धनराशि " सम्पादक हाइकु दर्पण " के नाम चेक अथवा बैंक ड्राफ्ट द्वारा निम्नलिखित पते पर भेजी जा सकती है -

सम्पादक 
हाइकु दर्पण
बी-12 ए / 58 ए
धवलगिरि
सेक्टर - 34, 
नोएडा- 201301 


Friday, March 15, 2013

हाइकु दर्पण का नया अंक

हाइकु दर्पण का नया अंक प्रकाशित हो गया है, यदि आप नियमित रूप से हाइकु दर्पण पढ़ना चाहते हैं तो कृपया हाइकु दर्पण के आजीवन सदस्य बनकर सहयोग करें।


Wednesday, March 06, 2013

हाइकु दर्पण अंक 11 के हाइकुकार


हाइकु दर्पण का अंक-11 प्रकाशित हो गया है। इस अंक में 81 हाइकुकारों के हाइकु प्रकाशित किये गये हैं जिनकी सूची यहाँ दी जा रही है। अंक के रचनाकार कृपया अपना डाक का पता  jagdishvyom@gmail.com  पर भेज दें ताकि उन्हें डाक से हाइकु दर्पण की प्रति भेजी जा सके।


हाइकु दर्पण अंक 11 के हाइकुकार --


  1. डा0 सुधा गुप्ता
  2. राम निवास पंथी
  3. डॉ0 सुरेन्द्र वर्मा
  4. लक्ष्मीशंकर वाजपेयी
  5. कमलेश भट्ट कमल
  6. हरेराम समीप
  7. स्वाति भालोटिया
  8. शशिकान्त गीते
  9. डा० शिवजी श्रीवास्तव
  10. नवल किशोर नवल
  11. ममता किरन
  12. प्रकाश खत्री
  13. त्रिलोक सिंह ठकुरेला
  14. संजीव आर्या
  15. संध्या सिंह
  16. कमल किशोर गोयनका
  17. मानोशी चटर्जी
  18. अर्बुदा ओहरी
  19. ज्योतिर्मयी पन्त
  20. डा० रमा द्विवेदी
  21. कल्पना रामानी
  22. डा0 सरस्वती माथुर
  23. महेन्द्र कुमार आर्य
  24. वीरेन्द्र आस्तिक
  25. रचना श्रीवास्तव
  26. भावना सक्सेना
  27. डा० मिथिलेश दीक्षित
  28. रजनी भार्गव
  29. रेखा नायक रानो
  30. राजीव नसीब
  31. अश्विनी कुमार विष्णु
  32. शशि पुरवार
  33. डा० आशा पाण्डेय
  34. सुजाता शिवेन
  35. योगेन्द्र वर्मा
  36. डा० राजकुमार पाटिल
  37. पूर्णिमा वर्मन
  38. करुणा वशिष्ठ
  39. कृष्णकुमार तिवारी किशन
  40. ज्योत्सना शर्मा
  41. वीरेश कुमार अरोड़ा
  42. डा० गोपाल बाबू शर्मा
  43. परमेश्वर फुंकवाल
  44. डा० रामनिवास मानव
  45. ओमप्रकाश नौटियाल
  46. प्रभा बिष्ट अधिकारी
  47. सन्तोष कुमार सिंह
  48. डा० मीना अग्रवाल
  49. तुहिना रंजन
  50. रमेश कुमार सोनी
  51. अरविन्द चौहान
  52. डा० राजकुमारी शर्मा राज
  53. मीनाक्षी धन्वंतरि
  54. सुमन दुबे
  55. राजीव गोल
  56. सुभाष नीरव
  57. कमला निखुर्पा
  58. अनिल वर्मा
  59. अरुण सिंह रुहेला
  60. शरद तैलंग
  61. सतपाल खयाल
  62. आर.पी. शुक्ल
  63. कृष्ण शलभ
  64. सुरेश चौधरी
  65. रजनीकान्त
  66. वीरेन्द्र आज़म
  67. अरुणा सक्सेना
  68. डा० सुरेन्द्र सिंघल
  69. हरिराम पथिक
  70. जितेन्द्र उपाध्याय
  71. डा० सपना सिंह
  72. डा० आर.के.सैनी
  73. ज्योत्सना प्रदीप
  74. डा० अनीता कपूर
  75. सोनल रस्तोगी
  76. आशा प्रभाष
  77. सुनीता अग्रवाल
  78. धर्मेन्द्र कुमार सिंह सज्जन
  79. प्रो० सुरेश कुमार
  80. हेमन्त रिछारिया
  81. डा० जगदीश व्योम   



Thursday, December 20, 2012

अंक - 25


हाइकु दिवस 2012 पर "साहित्यिक मधुशाला हाइकु समूह" द्वारा आयोजित हाइकु प्रतियोगिता की प्रथम तीन हाइकु कविताओं को यहाँ प्रकाशित किया जा रहा है। हाइकु कविताओं का चयन समूह के संचालकों द्वारा किया गया है।

(प्रथम)-

भरें उजास
कोटि हीरक कण
निशा नभ में
-सुशीला श्योराण


(द्वितीय)-

रात चुनर
हीरे जड़े तारों से
चाँद सा मोती
-पुष्पा त्रिपाठी


(तृतीय)-

नभ के तारे
जब उठे लहरें
झील में नाचें
- महेन्द्र वर्मा

.( तॄतीय ) Mahendra Varma

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फेसबुक से चयनित तीन हाइकु--

देख लेती वो
धुँधले चश्मे से भी
गुजरा कल

-डा० रमा द्विवेदी


बीनते रहे
सुखों की कतरन
गुजरी उम्र

-योगेन्द्र वर्मा


कँपकँपाते
जमते सर्द दिन
 अलाव ढूँढ़ें

-डा० सरस्वती माथुर

Thursday, December 13, 2012

अंक - 24


मृत जो हुयी
संवेदनाये मेरी
मैं जीती गयी


सहला गयी
घुंघराली लटों को
बेशर्म हवा

-सुनीता अग्रवाल
( फेसबुक हाइकु समूह से )

Monday, December 10, 2012

हाइकु दिवस 2012 के समाचार


हाइकु दिवस 2012 के अवसर पर विभिन्न स्थानों पर हाइकु पर केन्द्रित कार्यक्रम आयोजित किये गये, जिनका संक्षिप्त समाचार "हाइकु दर्पण" पर "विभिन्न गतिविधियों" के पन्ने पर प्रकाशित किया है, इन्हें यहाँ देखा जा सकता है। यदि आप में से किसी ने किसी स्थान पर हाइकु दिवस 2012 पर कोई कार्यक्रम आयोजित किया हो तो कृपया उसकी सूचना फोटो सहित इस ईमेल पर- jagdishvyom@gmail.com उपलब्ध करा सकते हैं जिन्हें यहाँ प्रकाशित किया जायेगा।

हाइकु दिवस 2012 के समाचार यहाँ देखें

Saturday, October 27, 2012

अंक 23


डा० मिथिलेश दीक्षित की हाइकु कविताएँ -


पानी की कमी
आँसू टपका रही
पानी की टंकी



पकड़ लेते हैं
एक दूसरे की बाँह
धूप और छाँह



हिलता नहीं
मजबूत जड़ों का
साहसी पेड़



आशा के बीज
छिपे हैं अदृश्य में
पुष्पित होंगे



रेत के घर
सागर की लहरें
कब ठहरे हैं



धूप बीनती
मृदुल दूब पर
बिखरे मोती

-डा० मिथिलेश दीक्षित

Monday, September 24, 2012

कुछ हाइकु



नाक पे बैठी
पानी चुआती रही
शीत हठीली

राधेश्याम
(हाइकु पत्र- 23,  जन. 1986 से साभार)


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गेहूँ की गंध
रच बस गयी है
चैती हवा में

आशा सिन्हा
(हाइकु पत्र- 25, जून. 1986 से साभार)

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पानी बरसा
खिली रक्त-पुष्प सी
वीर-बहूटी

रामकृष्ण विकलेश
(हाइकु पत्र- 26, अगस्त 1986 से साभार)

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गाँव ने रचीं
खेतों में कविताएँ
लहलहातीं

पारस दासोत
(आ चलें गाँव, हा.सं. से साभार)

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गाँव का हुक्का
है कमाल की बात
रिश्ते की गाँठ

पारस दासोत
(आ चलें गाँव, हा.सं. से साभार)

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पागल हवा
उजाड़ डाला नीड़
पंछी बेबस

ईप्सा यादव
(संगम हा.संकलन से साभार)

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भोली गौरैया
ताकती ललचाती
कलेउ वक्त

प्रत्यूष यादव
(संगम हा.संकलन से साभार)

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बच्चा हँसा
कायनात हँस दी
सूरज उगा


सरला अग्रवाल
(हाइकु दर्पण से साभार)

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अँधेरी रात
तारे कीलें ठोंकते
उजियारे की


सदाशिव कौतुक
(एक तिली, हाइकु संग्रह से साभार)

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