Sunday, January 15, 2017

अंक - 27

रामनिवास पंथी की ग्यारह हाइकु कविताएँ-


तोड़ते दम
खूँटियों पर टँगे
बाबा के वस्त्र
०००

दाँतों में दाबे
नायलोनी कोहरी
उतरी धूप
०००

नन्हें फूलों ने
लिखीं लघुकथाएँ
ओस बूँदों से
०००

नीड़ में गाती
पुरजोर टेक्नीक
कहाँ से लाती
०००

पतंगे जले
दीपक की बाँहों में
थोड़ी सी राख
०००

परिंदे उड़े
गंगा किनारे बैठी
सिर्फ खामोशी
०००

पलाश वन
सिन्दूर से नहाते
अलस्सुबह
०००

बगुले उड़े
आकाश बेल छूने
उन्मुक्त होने
०००

रात तो गई
उबरा नहीं गाँव
कोहरे में से
०००

शिल्प रचती
इल्म का समन्दर
बया भरती
०००

साधु-संत से
लंगोटी बाँधे आये
चिनार पत्ते

-रामनिवास पंथी
डलमऊ, रायबरेली

No comments: