Sunday, September 16, 2012

हाइकु समारोह 08 सितम्बर 2012


[माँ सरस्वती जी की मूर्ति पर माल्यार्पण करते हुए ओमप्रकाश यती, हरेराम समीप, कमलेश भट्ट कमल तथा अर्बुदा ओहरी]


हाइकु कविता की अभिव्यक्ति सामर्थ्य तथा शिल्प पर केन्द्रित हाइकु समारोह का आयोजन 08 सितम्बर 2012 को ‘इंटेलिविष्टो’ कम्पनी के सी-131, सेक्टर 2, नोएडा स्थिति सभागार में किया गया। समारोह की आयोजक अर्बुदा ओहरी ने आमंत्रित हाइकुकारों का पुष्पगुच्छ भेंट कर स्वागत किया। इस अवसर पर हाइकु के प्रसिद्ध संग्रहों तथा हाइकु पत्रिकाओं की प्रदर्शनी भी लगाई गई।

[विभिन्न हाइकु संग्रह तथा हाइकु दर्पण पत्रिका के अंक]
डा0 जगदीश व्योम ने कार्यक्रम का शुभारम्भ करते हुये कहा कि हाइकु कविता निरंतर लोकप्रिय होती जा रही है, हिन्दी के प्रतिष्ठित रचनाकार हाइकु लिख रहे हैं, हाइकु मात्र सत्रह अक्षर की कविता है इसलिए कभी कभी इसे बहुत सरल विधा समझने की भूल भी होती हरती है, कम अक्षरों में सम्पूर्ण कविता रचना कठिन कार्य है। एक आदर्श हाइकु की तीनों पंक्तियाँ स्वतंत्र होती हैं तथा उसमें गहन अनुभूति की अभिव्यक्ति होती है। कमलेश भट्ट कमल ने साहित्य अकादमी की पत्रिका ‘समकालीन भारतीय साहित्य’ में प्रकाशित अपने आलेख ‘हाइकु कविता की अभिव्यक्ति सामर्थ्य’ का पुनर्पाठ करते हुए कहा कि-



 ‘अपने सीमित और संक्षिप्त कलेवर के भीतर भी हाइकु को कई अनुशासनों का पालन करना होता है। एक अच्छे और आदर्श हाइकु की तीनों पंक्तियाँ सर्वथा पूर्ण और स्वतंत्र होती हैं, लेकिन तीनों एक साथ मिलकर एक बड़ी और प्रभावपूर्ण कविता रचती हैं। सहजता भी हाइकु का एक ऐसा गुण है, जिसके बिना हाइकु बिखराव का शिकार हो सकता है। सतही और हल्की-फुल्की अभिव्यक्तियाँ भी हाइकु की प्रकृति से मेल नहीं खाती हैं। हाइकु की अर्थवत्ता और सामर्थ्य को समझने के लिए इन चीजों को भी समझना आवश्यक है। अन्यथा किसी वाक्य को तोड़-मरोड़कर 5-7-5 के वर्णक्रम में रख देने वाले अथवा केवल तुकों के लिए लिखने वाले हाइकुकारों की हिन्दी में कोई कमी नहीं है। हाइकु जिस तरह की गम्भीर कविता है उसमें सतही अभिव्यक्तियों के लिए स्थान नहीं रहता है। इसे आप हाइकु की सीमा कह सकते हैं और उसकी गरिमा भी। हाइकु जैसे-जैसे इस गरिमा से च्युत होता जाएगा, वह प्रभाहीन और निष्प्राण होता चला जाएगा।’ इस अवसर पर हाइकु कविता के दिशावाहक प्रो0 सत्यभूषण वर्मा को उनकी इन पंक्तियों के माध्यम से याद किया गया- ‘‘हाइकु का प्रत्येक शब्द एक साक्षात अनुभव होता है और अपने क्रम में एक विशिष्ट अर्थ का द्योतक भी। कविता के अन्तिम शब्द तक पहुँचते ही एक पूर्ण बिंब, एक गहन भावबोध पाठक की चेतना को अभिभूत कर लेता है। अनुभूति जितनी प्रखर होगी, अभिव्यक्ति में भी उतनी ही ताजगी और सजीवता होगी।’’ हाइकु कार्यक्रम का संचालन करते हुए डा0 जगदीश व्योम ने अनेक सुप्रसिद्ध हाइकुकारों के हाइकु संग्रहों तथा लोकप्रिय हाइकु कविताओं के उदाहरण प्रस्तुत किए जिन्हें भरपूर सराहा गया।


इस अवसर पर डा0 सुधा गुप्ता, डा0 शैल रस्तोगी, डा0 सुरेन्द्र वर्मा, गोपाल बाबू शर्मा, डा0 मिथिलेश दीक्षित, डा0 रामनारायण पटेल, रामनिवास पंथी, रमाकान्त, डा0 भगवतशरण अग्रवाल, डा0 कुँअर बेचैन, आर.पी शुक्ला आदि हाइकुकारों की पुस्तकों से भी प्रतिनिधि हाइकु कविताएँ श्रोताओं के समक्ष प्रस्तुत की गईं। कार्यक्रम की आयोजक अर्बुदा ओहरी ने फेसबुक के हाइकु समूह से जुड़े हाइकुकारों की हाइकु कविताओं में से कुछ श्रेष्ठ हाइकु कविताओं को प्रस्तुत किया जिनमें- शशिकान्त गीते, शिवजी श्रीवास्तव, स्वाति भालोटिया, रजनी भार्गव, पूर्णिमा वर्मन, डा0 सरस्वती माथुर, सोनल रस्तोगी, वीरेश कुमार अरोरा, ज्योर्तिमयी पंत, संध्या सिंह, अरविन्द चौहान, भावना सक्सेना, त्रिलोक सिंह ठकुरेला, नवल किशोर नवल, राजीव नसीब, रचना श्रीवास्तव आदि प्रमुख थे।
समारोह में आमंत्रित सुप्रसिद्ध गजलकार एवं हाइकुकार ओमप्रकाश यती ने अपने कुछ हाइकु प्रस्तुत किए-
मैं न पहुँचा
मिट्टी हो गए पिता
राह देखते।

बेटे का घर
फिर भी है सहमी
माँ यहाँ पर।

अर्बुदा ओहरी ने अपने हाइकु के माध्यम से कहा-
पेड़ की जड़ें
माटी भीतर सींचे
जीवन-डोर।

इस अवसर पर सुप्रसिद्ध साहित्यकार हरेराम समीप के सद्यप्रकाशित हाइकु संग्रह ‘बूढ़ा सूरज’ का लोकार्पण किया गया। समीप जी ने अपने इस हाइकु संग्रह को समस्त हाइकुकारों को समर्पित किया है, इसका लोकार्पण भी समारोह में उपस्थित सभी हाइकुकारो ने मिलकर किया। समीप जी के इस हाइकु संग्रह में 450 हाइकु कविताएँ हैं जिनमें लगभग सभी हाइकु स्तरीय हैं। हाइकु संग्रहों की भीड़ में इस हाइकु संग्रह की अपनी अलग पहचान बनेगी। समीप जी ने संग्रह से अपने कई हाइकु प्रस्तुत किए जिन्हें भरपूर सराहा गया।



["बूढ़ा सूरज" का लोकार्पण करते हुए]





इस अवसर पर कमलेश भट्ट कमल, डा० जगदीश व्योम, ओमप्रकाश यती, अर्बुदा ओहरी, हरेराम समीप, ईप्सा यादव तथा गौरव पाल ने अपनी हाइकु कविताओं का पाठ किया जिन्हें सभी ने सराहा।



[ हाइकु कविता पर विमर्श करते हाइकुकार ]




समारोह में सत्यवीर सिंह मावई, कुसुम भट्ट, अलका यादव, प्रत्यूष आदि उपस्थित रहे ,समारोह अत्यन्त सफल रहा।

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