Monday, September 24, 2012

कुछ हाइकु



नाक पे बैठी
पानी चुआती रही
शीत हठीली

राधेश्याम
(हाइकु पत्र- 23,  जन. 1986 से साभार)


000000000

गेहूँ की गंध
रच बस गयी है
चैती हवा में

आशा सिन्हा
(हाइकु पत्र- 25, जून. 1986 से साभार)

0000000000


पानी बरसा
खिली रक्त-पुष्प सी
वीर-बहूटी

रामकृष्ण विकलेश
(हाइकु पत्र- 26, अगस्त 1986 से साभार)

0000000000


गाँव ने रचीं
खेतों में कविताएँ
लहलहातीं

पारस दासोत
(आ चलें गाँव, हा.सं. से साभार)

000000000000

गाँव का हुक्का
है कमाल की बात
रिश्ते की गाँठ

पारस दासोत
(आ चलें गाँव, हा.सं. से साभार)

00000000


पागल हवा
उजाड़ डाला नीड़
पंछी बेबस

ईप्सा यादव
(संगम हा.संकलन से साभार)

0000000000


भोली गौरैया
ताकती ललचाती
कलेउ वक्त

प्रत्यूष यादव
(संगम हा.संकलन से साभार)

0000000


बच्चा हँसा
कायनात हँस दी
सूरज उगा


सरला अग्रवाल
(हाइकु दर्पण से साभार)

0000000000


अँधेरी रात
तारे कीलें ठोंकते
उजियारे की


सदाशिव कौतुक
(एक तिली, हाइकु संग्रह से साभार)

000000000







3 comments:

Tamasha-E-Zindagi said...

आपको यह बताते हुए हर्ष हो रहा है के आपकी यह विशेष रचना को आदर प्रदान करने हेतु हमने इसे आज के (२८ अप्रैल, २०१३) ब्लॉग बुलेटिन - इंडियन होम रूल मूवमेंट पर स्थान दिया है | हार्दिक बधाई |

kashmiri lal chawla said...

Beautiful production

kashmiri lal chawla said...

Production well