Tuesday, May 12, 2020

अंक - 32 आशा पांडेय

हाइकु कविताएँ


अंक - 32
May - 2020
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                                                 - 01 -


नर्स की बेटी
खोज रही है माँ को
कोने कोने में
             
-आशा पांडेय


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विभिन्न टिप्पणियाँ
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बेहतरीन हाइकु है आशा पांडेय जी का।
डाक्टर और नर्स आज के सबसे अग्रिम मोर्चे पर वायरस से जंग में जूझ रहे हैं। 
नर्स की नन्ही बेटी माँ को घर के कोने कोने में खोजती रहती है .....
समूची दृश्य उभर आया है डा आशा पांडेय जी के इस हाइकु में।

डा० जगदीश व्योम
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खतरनाक कोरोना महामारी से वर्तमान में सारा विश्व जूझ रहा है। इस संकट की घड़ी में हमारे देश के कर्मवीर देश की सुरक्षा के लिए अपने प्राणों की परवाह न करते हुए कोरोना बीमारी से पीड़ितों की सेवा में लगे हुए हैं। हमारे देश के स्वास्थ्यकर्मी भी दिन-रात कुशलता से बीमारों की सेवा में लगे  हुए हैं। उनको अपने  परिवार से कई दिनों तक दूर रहना पड़ रहा है,ताकि इस बीमारी से परिवार पीड़ित न हो।
नर्स की नन्ही बेटी अपनी माँ को याद कर विचलित हो रही है,उसने बहुत दिनों से अपनी माँ को नहीं देखा है। इसलिए वह अपने इर्द-गिर्द माँ को तलाश कर  रही है।आशा जी आपका हाईकु ह्रदयस्पर्शी और वर्तमान हालात की जीवंत प्रस्तुति है। आपको बधाई व शुभकामनाएं 

-सविता बरई वीणा
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हाईकु की मुख्य विशेषता यह है कि यह समसामयिक परिस्थितियों को दर्शाता है, एक अच्छे लेखक की यही विशेषता होती है कि समाजिक गतिविधियों पर नज़र रखे और उसे अपने लेखन में विशेष स्थान दे.
इसके अतिरिक्त प्रस्तुत हाइकु का बिंब विधान बड़ा सुंदर है. जो दर्शाया गया है उससे इतर भी बहुत कुछ दिखता है, नर्स की बेटी माँ को खोज रही है दिख रहा है, हम यह भी देख पा रहे कि नर्स ड्यूटी पर है.
इसके अतिरिक्त हम सहज अंदाजा लगा सकते हैं कि बेटी बहुत छोटी है, समझदार होती तो माँ की व्यस्तता को समझती. कुल मिलाकर कह सकते कि तीन पंक्तियों और अल्प शब्द में रची एक विस्तृत कविता है यह हाइकु.

-बुशरा तबस्सुम
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सामयिक एवं मर्मस्पर्शी हाइकु। वर्तमान परिदृश्य को बिम्बित करती ।कोरोना महामारी के इस कठिन दौर में डॉक्टर,नर्स,पुलिस इत्यादि जिस तरह से जान हथेली पर लेकर अपने कर्तव्य पर डटे हुए है वो सभी देख रहे है। इनका डायरेक्ट कोरोना से मुकाबला है अपने इस कर्तव्य निर्वाहन के लिए कई कई दिन ये घर नही जा पा रहे है जब जाते भी ही बाहर से ही परिवार को देख लौट जाते है उनकी सुरक्षा के कारण। बेहद ही संवेदनशील दृश्य है ये ।जब छोटे बच्चे अपनी माँ को खोजते है आम दिनों से अलग है ये दृश्य। सम्भवतः माँ कुछ पल घर से आ कर बेटी को दूर से देख गयी हो उसके जाने के बाद किसी तरह भुला पुचकार कर रखी जा रही वो बच्ची घर में घूम घूम कर  माँ को खोज रही है। 
आशा जी को इस भावप्रधान,संवेदनापूर्ण हाइकु के लिए हार्दिक बधाई 

-सुनीता अग्रवाल नेह
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परिवार से बढ़कर देश को चुना एक माँ।बलिदानी माँ। संघर्ष करती माँ। अपनों और देश के प्रति अटूट प्रेम करती माँ। माँ को ढूंढ़ती बेटी हर दिल प्राणी को रुला देगा

-डा स्टेला कुजूर
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बहुत सार्थक हाइकु। समसामयिक संकट में सबसे अधिक जिम्मेदारी नर्स और डॉक्टर्स की है। नर्स का भी परिवार होता है । जब नर्स ड्यूटी पर होती है तब उसकी बेटी अपनी मां को कोने कोने में ढूंढ़ती है। मार्मिक दृश्य।

-डॉ रमा द्विवेदी, हैदराबाद
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उम्दा नर्स की कर्मठता बेटी के माध्यम से बयां

-अविनाश बागड़े
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वाह ! बहुत ही सुंदर हाइकु अपने परिवार से दूर रहकर किस तरह से अपने काम पर डटी हुई है नर्स..बखूबी दर्शाया गया हैं साथ ही बेटी का नर्स को ढूंढना बेहद हृदयस्पर्शी भाव व्यक्त कर रहा है

-अभिषेक जैन
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इस हाइकु में जो दृश्य उभर कर आया है ...उसे हर किसी ने इन दिनों चिकित्सकों और स्वास्थ्यकर्मियों पर ...उनके योगदान को लेकर आ रही खबरों में अवश्य ही देखा होगा। वो दृश्य आज इस हाइकु के माध्यम से फिर सामने आ गया है

-आभा खरे
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2 comments:

राजीव नामदेव राना लिधौरी said...

नर्स की बेटी खो...रही मां
बहुत बढ़िया हाइकु लिखा है
बधाई
स्वीकारें

तुकाराम पुंडलिक खिल्लारे said...

कोरोना वायरस ने रिश्तों में दूरियाँ खड़ी कर दी हैं । कोरोना न हो जायें इस डर से माँ बेटी भी मिल नहीं पा रहे हैं । नर्स जो समझदार हैं, बेटी नहीं । माँ सामने खड़ी हैं, फिर भी गोद में नही ले पा रही हैं । बेटी के लिए इतनी बड़ी दर्दनाक बात दूसरी नहीं हो सकती! हाइकु में यह सारा भाव व्यक्त हो रहा हैं ।
- तुकाराम पुंडलिक खिल्लारे