Saturday, October 27, 2012

अंक 23


डा० मिथिलेश दीक्षित की हाइकु कविताएँ -


पानी की कमी
आँसू टपका रही
पानी की टंकी



पकड़ लेते हैं
एक दूसरे की बाँह
धूप और छाँह



हिलता नहीं
मजबूत जड़ों का
साहसी पेड़



आशा के बीज
छिपे हैं अदृश्य में
पुष्पित होंगे



रेत के घर
सागर की लहरें
कब ठहरे हैं



धूप बीनती
मृदुल दूब पर
बिखरे मोती

-डा० मिथिलेश दीक्षित

2 comments:

Manu Tyagi said...

मेरे लिये नयी विधा है पर सु्दर लगती है

Kashmiri lal said...

चंगी विधा मन मोहती है