Friday, September 23, 2011

मीना अग्रवाल, स्वाती भालोटिया,रजनी भार्गव के हाइकु

अनुभूति समूह के फेसबुक पर आज कई कवियों नें अपनी हाइकु कविताएँ पोस्ट की हैं। इनमें से मीना अग्रवाल, स्वाती भालोटिया और रजनी भार्गव की कुछ हाइकु कविताएँ यहाँ प्रस्तुत की जा रही हैं। इन हाइकु कविताओं पर हाइकु पाठकों की टिप्पणी आमंत्रित की जा रही हैं।

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मीना अग्रवाल जी की हाइकु कविताओं में ये जीवन मूल्यों से जुड़े संकेत हैं-


ईर्ष्या का धुआँ
छा जाता, दृष्टिपथ
बनता कुआँ



संबन्ध राख
चढ़ती स्नेह पर
न कोई साख




आस की डोर
पहुँचाती ऊपर
पकडे़ छोर


-मीना अग्रवाल

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रजनी भार्गव जी की इन हाइकु कविताओं में बहुत सुन्दर बिम्ब उभर कर सामने आते हैं-



वाइन ग्लास
गिरी गुलाबी पत्ती
तस्वीरनुमा




मुंबई फ़िल्म
रंगीन टीन छ्त
चौल कोलाज




तैरती मीन
बाँसों का झुरमुट
टूटी टाइल




जडाऊ जूती
अलमारी का आला
पुराना रास्ता


-रजनी भार्गव

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स्वाती भालोटिया जी की इन हाइकु कविताओं में जीवन-सत्य को बहुत सुन्दर शब्दों में उद्घाटित किया गया है-


ओस की बूँद
जग को दिखलाये
जीवन-बिम्ब



आंखों के पाखी
लौट चले घरौंदा
रुकी न रात



जीवन-क्रम
पानी की कहानी है......
सूखा, सुनामी



सुन पुकार
संग हवा की धार
डोले सरसों



-स्वाती भालोटिया

5 comments:

रंजना [रंजू भाटिया] said...

बहुत खूब सभी ..बेहतरीन

डा.मीना अग्रवाल said...

व्योमजी, मेरे हाइकु आपने ‘हाइकु दर्पण’ में प्रकाशित किए,बहुत-बहुत आभारी हूँ. रजनीजी और स्वातिजी के हाइकु आज के संदर्भ में सटीक हैं. दोनों को बधाई.
मीना अग्रवाल

डा.मीना अग्रवाल said...

व्योमजी, मेरे हाइकु आपने ‘हाइकु दर्पण’’ में प्रकाशित किए,बहुत-बहुत आभारी हूँ. रजनीजी और स्वातिजी के हाइकु आज के संदर्भ में सटीक हैं. दोनों को बधाई.
मीना अग्रवाल

त्रिलोक सिंह ठकुरेला said...

Meena Agrawal,Swati Bhalotiya evam Rajani Bhargav sabhi ke haiku bahut achchhe hai.
TRILOK SINGH THAKURELA

जाट देवता (संदीप पवाँर) said...

शुभ दीपावली