Sunday, July 30, 2023

सरला अग्रवाल

बच्चा हँसा
कायनात हँस दी
सूरज उगा


-सरला अग्रवाल
(हाइकु दर्पण से साभार)

प्रत्यूष यादव

भोली गौरैया
ताकती ललचाती
कलेउ वक्त

-प्रत्यूष यादव
(संगम हा.संकलन से साभार)

ईप्सा यादव

पागल हवा
उजाड़ डाला नीड़
पंछी बेबस

-ईप्सा यादव
(संगम हा.संकलन से साभार)

पारस दासोत

गाँव ने रचीं
खेतों में कविताएँ
लहलहातीं

  -पारस दासोत
(आ चलें गाँव, हा.सं. से साभार)


गाँव का हुक्का
है कमाल की बात
रिश्ते की गाँठ

पारस दासोत
(आ चलें गाँव, हा.सं. से साभार)

आशा सिन्हा

गेहूँ की गंध
रच बस गयी है
चैती हवा में

  -आशा सिन्हा
(हाइकु पत्र- 25, जून. 1986 से साभार)

प्रदीप मैथानी

पेड़ सौंपते
पत्ते पीले-पीले
हरे होने को
 -प्रदीप मैथानी

जगदीश व्योम

ओस की बूँद
कैक्टस पर बैठी
शूली पे सन्त !
-डॉ0 जगदीश व्योम

उर्मिला कौल

शीतल तरु
झाड़ रहे अंगार
अमलतास 

-उर्मिला कौल

रजनी भार्गव

वाइन ग्लास
गिरी गुलाबी पत्ती
तस्वीरनुमा
-रजनी भार्गव


मुंबई फ़िल्म
रंगीन टीन छ्त
चौल कोलाज
-रजनी भार्गव


तैरती मीन
बाँसों का झुरमुट
टूटी टाइल
-रजनी भार्गव


जडाऊ जूती
अलमारी का आला
पुराना रास्ता
-रजनी भार्गव

माँ है गाँव में

माँ है गाँव में
बेटा है शहर में
रिश्ता फोन में 

-आर.पी.शुक्ल