Friday, April 06, 2012

अंक - 19

धवल मेघ
नीले आसमान में
रुई के फाहे।

-सुरेश कुमार



उगा सूरज
समेट के चादर
भागा अँधेरा ।

-सुभाष नीरव




माँ है गाँव में
बेटा है शहर में
रिश्ता फोन में ।

-आर.पी.शुक्ल




साँस का घर
घूमा संसार भर
रहा अकेला ।

-रजनी कांत




सोकर उठा
पूरब की गोद से
दिन आज भी ।

-वीरेन्द्र आज़म


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